Karnataka’s only horticulture university facing severe funds crunch

कर्नाटक की एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय को गंभीर वित्तीय संकट का सामना

कर्नाटक कृषि विश्वविद्यालय (Karnataka Horticulture University) का नाम शैक्षणिक व कृषि विकास के क्षेत्र में एक मानक माना जाता है। परंतु वर्तमान में यह विश्वविद्यालय गम्भीर आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा है। सरकार द्वारा आवंटित बजट और वास्तविक जरूरत के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए यह लेख लिखा गया है।

वित्तीय स्थिति का संक्षिप्त परिचय

इस विश्वविद्यालय को वेतन और परिचालन खर्चों के लिये वार्षिक 180 करोड़ रुपये का अनुदान चाहिए। अब तक सरकार ने केवल 138 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जबकि 3 करोड़ रुपये अभी भी लंबित हैं। अतः शेष 39 करोड़ रुपये का अंतर (180 – 138 – 3 = 39) विश्वविद्यालय की वित्तीय समस्या को और भी जटिल बनाता है।

वेतन और बाहरी कर्मचारियों के खर्चे

  • सतत (परमानेन्ट) कर्मचारियों के वेतन: लगभग 180 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष।
  • आउटसोर्स्ड (बाहरी) कर्मचारियों के खर्चे: 8-10 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष।

सरकारी अनुदान का वितरण

राज्य सरकार ने अब तक केवल 138 करोड़ रुपये जारी किए हैं। 3 करोड़ रुपये अभी भी लंबित हैं। शेष 39 करोड़ रुपये की कमी विश्वविद्यालय की शैक्षिक और अनुसंधान गतिविधियों पर गहरा असर डाल रही है।

वित्तीय तालिका

आइटमराशि (₹ करोड़)टिप्पणी
कुल अनुदान आवश्यकता180वेतन एवं परिचालन लागत
वितरित राशि138वर्तमान वर्ष तक
लंबित राशि3प्रक्रिया में
कुल कमी39अनुदान और वास्तविक आवश्यकता के बीच अंतर
परमानेन्ट कर्मचारियों के वेतन180विस्तृत वेतन
आउटसोर्स्ड कर्मचारियों के खर्चे8-10वार्षिक व्यय

क्यों यह संकट महत्वपूर्ण है?

कृषि और बागवानी के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन आवश्यक हैं। यह विश्वविद्यालय कर्नाटक में कृषि विज्ञान के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता है। बिना पर्याप्त अनुदान के, शोध परियोजनाएँ, प्रयोगशाला उपकरण, शिक्षण सुविधाएँ और छात्रवृत्तियाँ प्रभावित होंगी।

समाधान के संभावित विकल्प

  • सरकारी बजट में तत्काल बढ़ोतरी के लिए वकालत।
  • समानुपातिक अनुदान वितरण की व्यवस्था।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी से अतिरिक्त फंडिंग।

संपर्क और संदर्भ

कर्नाटक सरकार का आधिकारिक वेबसाइट: https://www.karnataka.gov.in

कर्नाटक कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक वेबसाइट: https://horticultureuniversitykarnataka.kar.nic.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. कर्नाटक कृषि विश्वविद्यालय के लिए वार्षिक अनुदान कितनी है? 180 करोड़ रुपये।
  2. सरकार द्वारा अभी तक कितना राशि जारी की गई है? 138 करोड़ रुपये।
  3. लंबित राशि कितनी है? 3 करोड़ रुपये।
  4. परमानेन्ट कर्मचारियों के वेतन कितना है? लगभग 180 करोड़ रुपये प्रति वर्ष।
  5. आउटसोर्स्ड कर्मचारियों के खर्चे कितने हैं? 8 से 10 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष।
  6. कौन से विभाग सबसे अधिक प्रभावित होंगे? अनुसंधान, शिक्षण, प्रयोगशाला और छात्रवृत्ति कार्यक्रम।
  7. इस वित्तीय अंतर का कारण क्या है? सरकारी बजट आवंटन और विश्वविद्यालय की वास्तविक आवश्यकता के बीच अंतर।
  8. इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है? बजट में बढ़ोतरी, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और अनुदान वितरण की समीक्षा।
  9. कौन सा सरकारी विभाग इस समस्या के लिए ज़िम्मेदार है? कृषि एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा वित्तीय विभाग।
  10. संपर्क करने के लिए कौन से फ़ोन नंबर या ईमेल उपलब्ध हैं? विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर संपर्क विवरण उपलब्ध है।

कर्नाटक के कृषि विकास में यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि सरकार इस वित्तीय समस्या का समाधान शीघ्रता से करे। इस लेख का उद्देश्य जागरूकता पैदा करना और समाधान के रास्ते दिखाना है।